कार्तिक पूर्णिमा: कब और क्यों मनाई जाती है
कार्तिक पूर्णिमा हिन्दू चंद्र पंचांग के अनुसार कार्तिक माह की पूर्णिमा को आती है। यह आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर में पड़ती है और कई स्थानों पर इसे विशेष पवित्रता वाली रात माना जाता है। घाटों पर दीपक जलाना, स्नान करना और मंदिरों में भक्ति-कार्य इसका मुख्य हिस्सा होते हैं।
क्या है इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व?
कार्तिक पूर्णिमा को कई समुदायों में शुभ माना जाता है। लोग मानते हैं कि इस दिन गंगा-या किसी पवित्र नदी में स्नान करने से पाप नष्ट होते हैं और कल्याण की प्राप्ति होती है। घाटों पर रात में दीपक जलाने की परंपरा खास है—VARANASI में इसे "देव दीपावली" के रूप में मनाया जाता है, जब सारी घाटों की रोशनी देखने लायक होती है।
इसके अलावा, इस दिन दान-पुण्य और धार्मिक पाठों का महत्व बढ़ जाता है। कुछ स्थानों पर मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं जो स्थानीय रिवाज और हस्तशिल्प को भी प्रदर्शित करते हैं।
मुख्य अनुष्ठान और रिवाज़ — क्या करें और किस तरह?
सबसे आम रिवाज़ों में शामिल हैं: सुबह-शाम नहाना, घाट पर जाकर दीपक जलाना, आरती में शामिल होना, मंदिर में प्रसाद चढ़ाना और गरीबों को दान देना। कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं या खास पूजा-अर्चना करते हैं।
घाट आरती में शामिल होना हो तो समय पहले से देख लें और भीड़ का ध्यान रखें। अगर आप परिवार के साथ जा रहे हैं तो बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए पहले से मिलन-बिंदु तय कर लें। दीपक जलाते समय प्लास्टिक का उपयोग न करें और आग के प्रति सावधान रहें।
यात्रा के समय एक और जरूरी बात: कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर प्रमुख तीर्थस्थलों पर भारी भीड़ और ट्रैफिक होता है। टिकट, पार्किंग और ट्रेन/बस की बुकिंग पहले से कर लें। रात में घाटों पर रोशनी की वजह से मोबाइल कैमरा अच्छा काम करता है—पर व्यक्तिगत सामान का ध्यान रखें।
क्या आप पहली बार शामिल हो रहे हैं? छोटे तेल वाले दीये या मिट्टी के दीप रखें, हल्का भोजन लें और स्थानीय वैदिक पंडितों या मंदिर के पुरोहित से पूजा-प्रकार की जानकारी ले लें। पूजा सामग्री जैसे तिल, फूल, अगरबत्ती और क्लीन कपड़ा पहले से तैयार रखें।
अगर आप धार्मिक कारणों से घर पर मनाना चाहते हैं तो साफ स्थान पर छोटा पूजा-विष्टार बनाएँ, दीपक रखें और संध्या-समय पर घर के बाहर भी एक छोटा अर्घ्य दें। बच्चों को दीपक की सुरक्षा सिखाएं और केरोसिन/प्लास्टिक से बने सामान से बचें।
कार्तिक पूर्णिमा पर होने वाले मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय खान-पान और हस्तशिल्प देखने को मिलते हैं। यह एक अच्छा मौका है कि आप स्थानीय परंपराओं को समझें और छोटे दुकानदारों का समर्थन करें।
अंत में, तारीख हर साल चंद्र कैलेंडर पर बदलती है—इसलिए सही तिथि और समय के लिए अपना स्थानीय पंचांग या मंदिर देखें। सुरक्षित यात्रा और पारिवारिक तैयारी से आप कार्तिक पूर्णिमा को शांति और भक्ति के साथ मना सकते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा 2024 को हिन्दू पंचांग में अत्यंत शुभ दिन माना जाता है, जिसे 15 नवम्बर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान शिव और विष्णु की आराधना की जाती है, जो भगवान शिव की त्रिपुरासुर पर विजय का प्रतीक है। इस दिन पावित्र स्नान, दीप दान और पूजन के विशेष कार्यक्रम होते हैं।
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