बल्लेबाजी फॉर्म: क्रिकेट में बल्लेबाजी की स्थिरता और उसका प्रभाव
बल्लेबाजी फॉर्म एक ऐसी चीज है जिसे कोई नहीं देख सकता, लेकिन हर कोई महसूस कर लेता है। बल्लेबाजी फॉर्म, एक बल्लेबाज की लगातार अच्छी प्रदर्शन की क्षमता, जो रन बनाने के साथ-साथ दबाव, गेंदबाजी और मैच की स्थिति के खिलाफ भी अपनी टेक्निक को बरकरार रखने की क्षमता को दर्शाता है। यह एक रन का आंकड़ा नहीं, बल्कि एक आत्मविश्वास का रास्ता है। जब एक बल्लेबाज फॉर्म में होता है, तो वह गेंद को देखता है, उसे समझता है, और फिर उसे उसके तरीके से जवाब देता है। यह फॉर्म कभी एक दिन का नहीं होता—यह लगातार बनाया जाता है।
इसी फॉर्म की वजह से बाबर आज़ाम, पाकिस्तान के कप्तान और आधुनिक क्रिकेट के सबसे स्थिर बल्लेबाज ने शाकिब अल हसन को पार करके अंतरराष्ट्रीय रनों में नया रिकॉर्ड बनाया। वह कभी भी बड़े शतकों के लिए इंतजार नहीं करता—वह लगातार रन बनाता रहता है। इसी तरह, शाई होप, वेस्टइंडीज के बल्लेबाज जिन्होंने 18वां वनडे शतक जड़कर टीम का रिकॉर्ड तोड़ा, ने दिखाया कि फॉर्म बनाने के लिए बस बड़ा स्कोर नहीं, बल्कि बार-बार अच्छा प्रदर्शन करने की आदत चाहिए। और ये बातें भारतीय क्रिकेट में भी सच हैं। अर्शिन कुलकर्णी, लखनऊ सुपर जायंट्स के ओपनर जिन्होंने जस्टिन लैंजर और रिशभ पंत की सलाह से अपनी बैटिंग रणनीति बदल दी, ने घरेलू क्रिकेट में अपने फॉर्म को बनाए रखा और आईपीएल 2025 के लिए एक नया रूप अपनाया।
फॉर्म के बारे में सबसे बड़ी भूल यह है कि यह किसी एक शतक या अर्धशतक से बनता है। नहीं। यह तो दिन भर की टेक्निक, रात भर की तैयारी और दिमाग की शांति से बनता है। जब शुबमन गिल को भारत के ODI कप्तान बनाया गया, तो यह उनके रनों की वजह से नहीं, बल्कि उनकी निरंतरता की वजह से हुआ। वह हर मैच में बल्लेबाजी के अपने तरीके को बरकरार रखते हैं। यही फॉर्म है।
इस लिस्टिंग में आपको ऐसे ही बल्लेबाजों की कहानियाँ मिलेंगी—जिन्होंने फॉर्म को अपने तरीके से बनाया, उसे बनाए रखा, और फिर दुनिया को दिखा दिया। चाहे वो एक टेस्ट मैच में इनिंग्स जीत हो, या एक ओवर में रन बनाने की ताकत, या फिर एक नवयुवक का आईपीएल में डेब्यू—ये सब बल्लेबाजी फॉर्म के अलग-अलग रूप हैं। यहाँ आपको वो सब मिलेगा जो आपको बताता है कि एक बल्लेबाज कैसे अपने अंदर के फॉर्म को जगाता है।
सूर्यकुमार यादव ने 2025 में सात बार सिंगल डिजिट स्कोर पर आउट होकर अपनी कप्तानी का सबसे खराब दौर देखा। एशिया कप फाइनल में 1 रन और औसत 14 के साथ उनकी बल्लेबाजी चिंता का विषय बन गई।
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