नाबालिग आरोपी: क्या करें और आपके अधिकार
अगर परिवार में कोई बच्चा या किशोर नाबालिग आरोपी बन गया है तो डर स्वाभाविक है। पहले यह जान लें कि कानून बच्चे को अपराधी नहीं समझकर उसकी सुधार व रक्षा पर ज़्यादा ध्यान देता है। पर सही कदम तुरंत उठाना ज़रूरी है — गलत प्रतिक्रिया स्थिति बिगाड़ सकती है।
भारत में नाबालिग की परिभाषा 18 साल से कम है। Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 के तहत बच्चे को अलग प्रक्रिया मिलती है। लेकिन गंभीर (heinous) मामलों में 16-18 साल के नाबालिगों की मानसिक व सामाजिक परख कर के वयस्क अदालत में भेजने का फैसला Juvenile Justice Board (JJB) कर सकती है।
पुलिस मिलने पर तुरंत करना क्या चाहिए
सबसे पहले शांत रहें। पुलिस को बताएं कि आरोपी नाबालिग है और उसे Juvenile Justice Board के पास पेश करना होगा। किसी भी दस्तावेज़ पर बिना माता‑पिता/अभिभावक और वकील के हस्ताक्षर न करें। बच्चे का मेडिकल या बयान लेने से पहले वकील और अभिभावक मौजूद रहें।
कानून के मुताबिक पुलिस को नाबालिग को 24 घंटे के भीतर JJB के पास पेश करना होता है — न कि सजा वाली जेल में रख सकना। पुलिस रिपोर्ट (FIR) दर्ज हो सकती है, लेकिन हिरासत, पूछताछ और रिमांड के नियम अलग होते हैं।
उम्र निर्धारण और दस्तावेज़
उम्र साबित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल रिकॉर्ड, Aadhar जैसी दस्तावेज़ सबसे भरोसेमंद होते हैं। जब दस्तावेज न हों तो मेडिकल/हड्डी‑टेस्ट का सहारा लिया जा सकता है, पर ये 100% सटीक नहीं होते। इसलिए जितने भी दस्तावेज़ मिलें, संभालकर रखें और JJB को दिखाएँ।
JJB की प्राथमिकता सजा नहीं बल्कि सुधार, परामर्श और पुनर्वास होती है। बोर्ड आवश्यक समझे तो बाल न्यायिक संस्थान में त्वरित मूल्यांकन कर के फैसला करेगा कि गठन‑घर (observation home), सुधार गृह या कानूनी प्रक्रिया आगे कैसे चलेगी।
नाबालिग को कानूनी सहायता का अधिकार है। Legal Services Authority मुफ्त वकील उपलब्ध कराती है — तुरंत संपर्क करें। वकील होने पर बयान देने, समझौता करने या कोर्ट में पैरवी करने में मदद मिलती है।
परिवार के लिए व्यावहारिक सुझाव: भावुक पोस्ट सोशल मीडिया पर न डालें, मीडिया से बचें, स्कूल/समुदाय के रिकॉर्ड एकत्र करें और वकील से मिलकर अगला कदम तय करें। बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलिंग शीघ्र शुरू कराएँ।
अगर आप पीड़ित हैं तो रिपोर्ट करें और पुलिस व JJB प्रक्रिया के बारे में जानें। नाबालिग के मामले में भी पीड़ित के अधिकार होते हैं — सुरक्षा, न्याय और मुआवजा की मांग की जा सकती है।
अंत में — जल्दी व सही वकीली सलाह लें, दस्तावेज़ जोड़ें और JJB की सुनवाई में सहयोग करें। Juvenile process आपकी मदद के लिए बनाया गया है; समझदारी से कदम उठाने पर नतीजा संतोषजनक होना संभव है।
मदद चाहिए? जिले की Legal Services Authority या स्थानीय बाल न्यायिक बोर्ड से संपर्क करें — वे मुफ्त मार्गदर्शन और वकील उपलब्ध कराते हैं।
पुणे पुलिस ने पोर्शे दुर्घटना में शामिल 17 वर्षीय नाबालिग आरोपी के पिता को गिरफ्तार कर लिया है। इस हादसे में दो युवा आईटी पेशेवरों की जान चली गई थी। पुलिस नाबालिग के खिलाफ वयस्क के रूप में मुकदमा चलाने की अनुमति मांग रही है।
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