सड़क सुरक्षा: रोज़मर्रा के लिए आसान और असरदार नियम
सड़क पर छोटी सी लापरवाही भी बड़ी मुसीबत बना सकती है। अगर आप ड्राइव करते हैं या पैदल चलते हैं, तो कुछ बेसिक आदतें बदलकर आप खुद और दूसरों की जान बचा सकते हैं। नीचे दिए गए कदम सीधा काम आते हैं — तुरंत अपनाएं।
पहला फोकस: वाहन और खुद की सुरक्षा
हेलमेट पहनें — हमेशा। WHO के आंकड़ों के मुताबिक सही तरीके से पहना गया हेलमेट सिर की चोटें करीब 69% तक कम कर सकता है। मतलब, यह सिर्फ नियम नहीं, जिंदगी बचाने वाला साधन है।
सीट बेल्ट हमेशा बांधें — पीछे बैठे हों तो भी। सीट बेल्ट दुर्घटना में फेंके जाने की जोखिम घटाता है और गंभीर चोटों को रोकता है।
बच्चों के लिए सही कार सीट का उपयोग करें। उम्र और वजन के हिसाब से चाइल्ड सीट या बोस्टर सीट लगाएं। गोद में बच्चे बैठाने से बचें।
शराब या नशे में कभी न चलाएं। सोचा-समझा निर्णय नहीं होता — रिफ्लेक्स धीमा पड़ जाता है और दुर्घटना का खतरा बहुत बढ़ जाता है।
ड्राइविंग और सड़क पर व्यवहार के व्यावहारिक टिप्स
गति सीमाओं का पालन करें। तेज़ी से ब्रेक लगाने पर नियंत्रण कम होता है और दुर्घटना का जोखिम बढ़ता है।
फोन का इस्तेमाल बंद रखें। कॉल या मैसेज के लिए रोककर ही मोबाइल देखें। हैंड्स-फ्री भी ध्यान भटका सकता है।
ओवरटेक करते समय इंतज़ार करें और संकेत दें। अचानक पास करने से सामने वाले ड्राइवर या पैदल चलने वालों के लिए खतरा बनता है।
टायर्स, ब्रेक और लाइट्स की नियमित जांच करें। वाहन में छोटी-मोटी खराबी भी किसी आपात स्थिति में बड़ा नुकसान करा सकती है।
रात में रिफ्लेक्टिव वियर या रिफ्लेक्टर लगाएँ — पैदल चलने वाले और साइकिल सवारों के लिए यह बेहद असरदार है। ड्राइवर को सड़कों पर आपकी मौजूदगी जल्दी दिख जाती है।
अगर हादसा हो जाए तो ठंडा दिमाग रखें: तुरंत वाहन नरोकें, कम से कम खतरे वाले स्थान पर रोककर हाय-फ्लैशर लगाएं। चोटिलों को बिना सीधे हिलाए प्राथमिक मदद दें और एम्बुलेंस को कॉल करें। मौके पर crowd-control रखें और पुलिस को सूचित करें।
सड़क सुरक्षा सिर्फ नियम नहीं है— यह आदतों का सेट है। परिवार में छोटे बच्चों को भी सड़क के बेसिक्स सिखाएं: लाल बत्तियाँ, फ्लाइंग ओवर पास करने से पहले देखना, और फुटपाथ पर चलना।
समय-समय पर अपने शहर के नियम और नए बताए गए सुरक्षा उपाय जानें। छोटे बदलाव — जैसे हेलमेट का सही फिट, सीट बेल्ट की आदत, मोबाइल छोड़ना — जीवन बचाने के लिहाज से बड़े असर दिखाते हैं।
सुरक्षित रहिए, सावधान रहिए और सड़क पर दूसरों का भी ध्यान रखें। यही असली सड़क सुरक्षा है।
पुणे पुलिस ने पोर्शे दुर्घटना में शामिल 17 वर्षीय नाबालिग आरोपी के पिता को गिरफ्तार कर लिया है। इस हादसे में दो युवा आईटी पेशेवरों की जान चली गई थी। पुलिस नाबालिग के खिलाफ वयस्क के रूप में मुकदमा चलाने की अनुमति मांग रही है।
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