गोवर्धन पूजा: महत्व, विधि और आसान टिप्स

आपने शायद सुना होगा कि गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले दिन मनाई जाती है। यह पूजा भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा से जुड़ी है। पूजा का उद्देश्य प्रकृति, गाय और परिवार के लिए कृतज्ञता जताना है।

गोवर्धन पूजा क्यों करें — सरल वजहें

क्या आप घर पर जल्दी-सी पूजा करना चाहते हैं? गोवर्धन पूजा घर और गांव में खुशहाली, कृषि समृद्धि और पशुओं की सुरक्षा के लिए की जाती है। यह प्रकृति के साथ तालमेल और अहिंसा का संदेश देती है। अन्नकूट के जरिए सामूहिक भोग देकर समुदाय में बांटने की परंपरा भी जुड़ी है।

गोवर्धन पूजा कैसे करें — कदम दर कदम

यहां सीधी और काम की विधि है, जिसे सुबह सूर्य उदय के बाद या शाम को किया जा सकता है।

1) तैयारी: छोटी मिट्टी या पत्तियों की गोबर की चटाई पर गोवर्धन का छोटा सा डोल बनाइए (पत्थर या मिट्टी से छोटा 'पहाड़' बना लें)।

2) साफ-सफाई: पूजा स्थल स्वच्छ रखें। गाय या उनकी तस्वीर को साफ कपड़ा और फूल दें।

3) अन्नकूट (भोजन की चोरी): चावल, दाल, सब्जी, मिठाई, फल और कुछ पकवान छोटे-छोटे ढंग से गोवर्धन के सामने रखें। ये एक बड़ा भोग बनाते हैं जिसे बाद में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।

4) देवता पूजन: दीप जलाएं, अगरबत्ती और फूल अर्पित करें। छोटा सा मंत्र बोलें जैसे "ॐ श्रीकृष्णाय नमः" या कोई पारिवारिक प्रार्थना।

5) पारिवारिक सहभागिता: बच्चे और बुजुर्ग साथ बैठकर भोग अर्पित करें और प्रसाद बाँटें।

6) दान और सेवा: बच्चों के लिए कुछ खाने-पीने का पैकेट रख दें और जरूरतमंदों को दान दें। यह परंपरा का बड़ा हिस्सा है।

7) समापन: पूजा के बाद भोग का वितरण समान रूप से करें और बचा हुआ खाना पर्यावरण के अनुकूल तरीके से निपटायें या गायों को खिलाएं (यदि सुरक्षित है)।

यह विधि आसान है और शहर के छोटे घरों में भी कर सकते हैं। क्या मंदिर जाना संभव न हो तो घर पर ही छोटे गोवर्धन बनाकर पूजा कर लें।

उपयोगी सुझाव — थोडा काम का

- प्लास्टिक से बचें: प्लेट, सजावट और पन्नी के स्थान पर पुनर्चक्रण योग्य चीज़ें रखें।

- शुद्ध सामग्री: अन्नकूट के लिए घर का बना खाना रखें; पके सामान को ढक कर रखें।

- समय: अधिकतर लोग सुबह सूर्य उदय के बाद अन्नकूट और पूजा करते हैं। अगर सुबह व्यस्त हों तो शाम को भी संकल्प के साथ कर सकते हैं।

- सुरक्षा: दीप जलाते समय बच्चों और पालतू जानवरों का ध्यान रखें।

अगर आप पहली बार कर रहे हैं तो किसी बुजुर्ग या मंदिर के पुजारी से छोटी-सी मदद ले लें। पूजा का असल मतलब भौतिकता नहीं, कृतज्ञता और साझा करने की भावना है। खुशियों वाले दिन पर यह छोटा‑सा आयोजन दिल को शांत कर देता है और परिवार को जोड़े रखता है।

गोवर्धन पूजा 2024: तिथि, महत्व और उत्सव की विधियाँ

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गोवर्धन पूजा, जिसे अन्नकूट भी कहा जाता है, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाई जाती है। यह उत्सव भगवान कृष्ण की इंद्र देव पर विजय का प्रतीक है और इसे 2024 में 2 नवंबर को हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। इस दिन गायों की पूजा और गोवर्धन पर्वतीय प्रतिमा का निर्माण होता है। इस भव्य समारोह के दौरान भोग के रूप में विशेष अन्नकूट तैयार किया जाता है।

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