महिलाओं पर हिंसा: पहचान करें और सुरक्षित रहें

हिंसा सिर्फ धक्के या चोट नहीं होती। यह मानसिक धमकी, मानहानि, आर्थिक नियंत्रण, अनचाही छेड़खानी या शादी-शुदा रिश्तों में दमन भी हो सकता है। अक्सर पीड़िता खुद को शर्मिंदा या अकेला महसूस करती है और मदद मांगना मुश्किल लगता है। पर कदम उठाने से स्थिति बदली जा सकती है।

किस तरह की हिंसा देखें

कुछ सामान्य प्रकार जो आप पहचान सकते हैं:

  • शारीरिक हिंसा: धक्का, मारपीट, घुटन, चोट।
  • मानसिक हिंसा: गाली-गलौज, धमकाना, लगातार अपमानित करना।
  • लैंगिक हिंसा: अनचाही छेड़खानी, बलात्कार या जबरदस्ती।
  • आर्थिक हिंसा: पैसे रोकना, नौकरी न करने देना, स्वतंत्रता छीनना।
  • सामाजिक नियंत्रण: रिश्तेदारों/दोस्तों से अलग करना, फोन और सोशल मीडिया नियंत्रित करना।

अगर आप या कोई नज़दीकी पीड़ित है तो क्या करें

पहला कदम—अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करें। क्या आप सुरक्षित जगह पर जा सकती हैं? अगर तुरंत खतरा हो तो 112 पर कॉल करें। कई जगहों पर महिला हेल्पलाइन 181 भी उपलब्ध है।

दूसरे कदम—सबूत जुटाएँ। चोट के फोटो, खतरे भरे मैसेज, कॉल रिकॉर्ड और मेडिकल रिपोर्ट सुरक्षित रखें। ये आगे कानूनी मदद में काम आएंगे।

तीसरा—मेडिकल और कानूनी कदम। चोट लगने पर अस्पताल में जांच कराएं और मेडिकल रिपोर्ट लें। FIR दर्ज कराने के लिए नजदीकी पुलिस स्टेशन जाएँ; महिला थाना या महिला हेल्पडेस्क मददगार होते हैं। घरेलू हिंसा के मामले में "Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005" के तहत सुरक्षा आदेश और भरण-पोषण की मांग की जा सकती है। गंभीर यौन अपराधों में IPC की धाराएँ (जैसे बलात्कार) लागू होती हैं।

चौथा—सहायता खोजें। स्थानीय एनजीओ, शेल्टर होम, कानूनी सेवा संस्थान और राष्ट्रीय/राज्य महिला आयोग मदद करते हैं। NCW (National Commission for Women) की वेबसाइट पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं और राज्य महिला आयोग से भी संपर्क करें। कई शहरों में संकटकालीन बाहर निकलने के लिए शेल्टर होम उपलब्ध हैं।

पाँचवा—भावनात्मक समर्थन भी ज़रूरी है। दोस्त, परिवार या काउंसलर से बात करें। घरेलू हिंसा पर काम करने वाली NGOs अक्सर मुफ्त काउंसलिंग और कानूनी मार्गदर्शन देती हैं। अकेले निर्णय लेने की कोशिश न करें—समूह में मदद लेना बेहतर रहता है।

समुदाय के तौर पर आप क्या कर सकते हैं? जब आप किसी पर हिंसा का संकेत देखें तो नज़रअंदाज़ न करें। पीड़िता से विनम्रता से बात कर के भरोसा जीतें, आपातकाल में पुलिस को सूचित करें, और स्थानीय सहायता संगठनों के संपर्क बताएं। कभी-कभी सिर्फ एक स्नेहभरा शब्द किसी की हिम्मत बढ़ा देता है।

यह विषय संवेदनशील है; अगर आप मदद चाहते हैं तो तुरंत 112 या स्थानीय महिला हेल्पलाइन 181 पर कॉल करें, नजदीकी महिला थाना जाएँ या किसी भरोसेमंद NGO से संपर्क करें। सुरक्षा पहले—बाद में कानूनी और भावनात्मक समाधान पर काम करें।

अगर आप चाहते हैं, मैं आपके शहर के लिए मदद के संसाधन और स्थानीय NGO के नाम ढूँढ कर दे सकता/सकती हूँ। बस अपना शहर बताइए।

पेरिस उगांडा की ओलंपियन रेबेका चेपतेगेई को सम्मानित करेगा, खेल स्थल का नाम उनके नाम पर रखा जाएगा

पेरिस उगांडा की ओलंपियन रेबेका चेपतेगेई को सम्मानित करेगा, खेल स्थल का नाम उनके नाम पर रखा जाएगा

पेरिस शहर ने उगांडा की ओलंपियन रेबेका चेपतेगेई को सम्मानित करने का निर्णय लिया है, जो अपने साथी द्वारा मारी गई थीं, खेल स्थल का नाम उनके नाम पर रखा जाएगा। 33 साल की चेपतेगेई ने पेरिस ओलंपिक्स में महिलाओं की मैराथन में हिस्सा लिया था और उनकी दुखद मौत ने लिंग आधारित हिंसा के मुद्दों को उजागर किया है।

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